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El problemo

(English translation of this hindi poem is written right after) उलझी रह गई उलझनों में, सुलझाने चली उलझनों को, सुलझाना क्या चाहा उलझनों को, और उलझती चली मैं उलझनों में। बारिश हुई बिन बादल के कोहरा छाया घना घना, एक उलझन सुलझाने को मेरा मन भी बना बना। उलझन सुलझी सूरज आया, फिर बाक़ी उलझनों… Continue reading El problemo